अथर्ववेद्: इसमें ब्रह्म ज्ञान, औषधि प्रयोग, रोग निवारण, जन्त्र-तन्त्र टोना-टोटका आदि का वर्णन है। इस सभ्यता में मातृदेवी की उपासना का प्रमुख स्थान था। साथ ही पशुपति, लिंग, योनि, वृक्षों एवं पशुओं की भी पूजा की जाती थी। समाज स्पष्ट रूप से चार वर्णों; ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र, में https://claytonfcbzq.celticwiki.com/1668178/the_2_minute_rule_for_ghar_baithe_typing_se_paise_kaise_kamaye
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